पंचांग
पंचांग भारतीय कालगणना की एक पारंपरिक प्रणाली है, जिसके माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी प्राप्त होती है। यह पृष्ठ पंचांग को शैक्षिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समझाने के लिए बनाया गया है।
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि: चंद्रमा और सूर्य के बीच कोणीय दूरी के आधार पर निर्धारित होती है।
- वार: सप्ताह का दिन, जो ग्रहों के नाम पर आधारित होता है।
- नक्षत्र: चंद्रमा की स्थिति के अनुसार आकाश के 27 भाग।
- योग: सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनने वाली स्थिति।
- करण: तिथि के आधे भाग को करण कहा जाता है।
भारतीय परंपरा में पंचांग का महत्व
पंचांग का उपयोग प्राचीन काल से समय निर्धारण, पर्व-त्योहारों की तिथि ज्ञात करने तथा दैनिक जीवन की योजना बनाने के लिए किया जाता रहा है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है।
शैक्षिक उपयोग
पंचांग का अध्ययन ज्योतिष, इतिहास और भारतीय संस्कृति को समझने में सहायक होता है। इसे किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत निर्णय या भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अस्वीकरण
यह पंचांग संबंधी जानकारी केवल शैक्षिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। इसे किसी भी प्रकार की भविष्यवाणी, उपाय या व्यक्तिगत सलाह न माना जाए।
जनवरी 2026 – पंचांग कैलेंडर
यह कैलेंडर वैदिक पंचांग की तिथि एवं नक्षत्र संरचना को शैक्षिक उद्देश्य से समझाने हेतु बनाया गया है। किसी भी प्रकार की भविष्यवाणी या उपाय का उद्देश्य नहीं है।
